पेशा कानून के तहत बरवेनगर ग्राम सभा का बड़ा फैसला, तालाबों की सरकारी डाक पर रोक; सामूहिक मत्स्य पालन का प्रस्ताव पारित

 



जागता झारखंड संवाददाता विक्की कुमार चैनपुर गुमला 

 जानकारी देते हुए शाम 5:00 बजे बताया गया कि पेशा अधिकार अधिनियम, 1996 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए चैनपुर प्रखंड के बरवेनगर ग्राम सभा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। फुलवारटोली मैदान में आयोजित विशेष ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मौजा क्षेत्र के सभी छोटे-बड़े तालाबों की सरकारी डाक (नीलामी) प्रक्रिया का विरोध करते हुए सामूहिक रूप से मत्स्य पालन करने का निर्णय लिया।

ग्राम प्रधान जोसेफ खलखो की अध्यक्षता तथा वन समिति अध्यक्ष प्रमोद खलखो के संचालन में आयोजित बैठक में बरवेनगर, मुंडाटोली, रैनटोली और फुलवारटोली के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से कहा गया कि मौजा क्षेत्र के तालाबों पर पहला अधिकार स्थानीय ग्राम सभा और ग्रामीणों का है। इसलिए बाहरी एजेंसियों अथवा सरकारी स्तर से होने वाली डाक प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

ग्राम सभा ने निर्णय लिया कि सभी तालाबों में सामूहिक रूप से मछली जीरा डाला जाएगा तथा मत्स्य पालन किया जाएगा। इससे होने वाली आय ग्राम सभा कोष में जमा होगी, जिसका उपयोग गाँव और मौजा के विकास कार्यों में किया जाएगा। बैठक में पेशा अधिनियम के तहत जल स्रोतों, वन संपदा एवं प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा की निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया गया।

ग्राम प्रधान जोसेफ खलखो ने कहा कि पहले सरकार तालाबों का तीन वर्षों के लिए टेंडर देती थी, लेकिन अब पेशा कानून के तहत ग्राम सभा अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए तालाबों को आय का स्थायी स्रोत बनाएगी।

वन समिति अध्यक्ष प्रमोद खलखो ने कहा कि मौजा के सभी प्राकृतिक संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार है और सामूहिक मत्स्य पालन से प्राप्त राजस्व का उपयोग ग्रामीण विकास में किया जाएगा।

बरवेनगर निवासी करीम खान और सामएल खलखो ने कहा कि ग्रामीणों की मांग है कि डाक प्रथा समाप्त कर तालाब ग्राम सभा के अधीन सौंपे जाएं, ताकि स्थानीय लोग मिलकर मत्स्य पालन करें और गाँव आत्मनिर्भर बने।

बैठक में पारित प्रस्ताव की प्रतिलिपि उपायुक्त, मत्स्य विभाग, सहकारिता विभाग तथा चैनपुर अंचल कार्यालय को भेजने का निर्णय लिया गया। इस दौरान ग्राम प्रधान जोसेफ खलखो, वन समिति अध्यक्ष प्रमोद खलखो, सुभाषित खान, दिवा राम, बिक्रम राम सहित सैकड़ों महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान लगाकर प्रस्ताव का समर्थन किया।

 चैनपुर के बरवेनगर ग्राम सभा का ऐतिहासिक फैसला!

पेशा कानून के तहत ग्रामीणों ने तालाबों की सरकारी डाक का विरोध करते हुए सामूहिक मत्स्य पालन का निर्णय लिया। अब तालाबों से होने वाली आय ग्राम सभा कोष में जाएगी और गाँव के विकास पर खर्च होगी।

क्या आपको लगता है कि पेशा क्षेत्रों में तालाबों का अधिकार ग्राम सभा के पास होना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

Post a Comment

और नया पुराने