आसनवनी में फर्जी जाति-निवास प्रमाण पत्र का खुलासा, सीओ ने किए दस्तावेज रिजेक्ट, सीएससी केंद्र पर छापा



जागता झारखंड संवाददाता रानीश्वर दुमका। उप राजधानी दुमका के अन्तर्गत रानीश्वर प्रखंड में फर्जी तरीके से जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनाए जाने के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। मंगलवार को अंचल कार्यालय में एसआईआर से संबंधित दस्तावेजों की जांच के दौरान मामला सामने आने के बाद अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को एक लाभुक का जाति-निवास प्रमाण पत्र जांच के दौरान संदिग्ध पाया गया। पूछताछ में लाभुक ने बताया कि उसने प्रमाण पत्र आसनबनी स्थित हीरो शोरूम के समीप संचालित सीएससी केंद्र से बनवाया था। सूचना मिलते ही अंचल अधिकारी शांदा नुसरत अपनी टीम के साथ उक्त सीएससी केंद्र पर पहुंची और छापेमारी कर जांच की। जांच में प्रमाण पत्र सरकारी प्रारूप से अलग और छेड़छाड़ किया हुआ पाया गया। इसके बाद अंचल अधिकारी ने आदिवासी महिला एलीना मुर्मू सहित दो से तीन संदिग्ध दस्तावेजों को तत्काल रिजेक्ट कर दिया।

सरकारी प्रारूप से अलग बनाए जा रहे थे प्रमाण पत्र

अंचल अधिकारी शांदा नुसरत ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप में ही जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग एप या अन्य माध्यमों से प्रमाण पत्र में गलत तरीके से बदलाव कर उसे बाजार में उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को जांच के लिए करीब छह से सात दस्तावेज अंचल कार्यालय पहुंचे थे, जिनमें से कुछ लाभुक पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

पूछताछ में लाभुकों ने बताया कि प्रमाण पत्र हीरो शोरूम के बगल में स्थित कंप्यूटर दुकान से बनवाए गए थे। जानकारी के अनुसार उक्त दुकान का लाइसेंस संचालक की पत्नी के नाम पर है। राजेंद्र सोरेन नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी दो फॉर्म प्रज्ञा केंद्र से बनवाने की बात कही है।

रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी ।

अंचल अधिकारी ने कहा कि मामले की पूरी जानकारी लिखित रूप से उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। संबंधित सीएससी केंद्र की विस्तृत जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि जाति एवं निवास प्रमाण पत्र केवल अधिकृत केंद्र या अंचल कार्यालय से ही बनवाएं और दस्तावेज प्राप्त करने के बाद उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।

इधर, जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद रानीश्वर प्रखंड में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस गड़बड़ी में कितने लोग शामिल हैं और कितने प्रमाण पत्र गलत तरीके से जारी किए गए हैं।

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