सामाजिक वानिकी कार्यों में भारी अनियमितता के आरोप, जीएम लैंड की एनओसी जमाबंदी में लगी पोधा। जांच की मांग

जागता झारखंड संवाददाता रानीश्वर दुमका।

उप राजधानी दुमका के अन्तर्गत रानीश्वर प्रखंड में सामाजिक वानिकी योजना के तहत संचालित तालाब निर्माण एवं पौधारोपण कार्यों में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों एवं सूत्रों ने कार्यों में पारदर्शिता की कमी, मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी, मशीनों के अत्यधिक उपयोग तथा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार कई परियोजनाओं में ट्रेंच कटिंग एवं तालाब खुदाई जैसे कार्यों में पॉकलेन मशीन का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि जिन कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलना चाहिए था, वहां मशीनों से काम कराया जा रहा है। इसके अलावा गैर-वन भूमि पर भी भू-संरक्षण संबंधी कार्य कराए जाने की बात कही जा रही है।

मजदूरों ने आरोप लगाया है कि पौधारोपण कार्य में उन्हें मात्र 250 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जा रहा है, जबकि निर्धारित सरकारी मजदूरी 433 रुपये प्रतिदिन बताई जाती है। इस संबंध में पूछे जाने पर फील्ड कर्मियों द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

स्थानीय सूत्रों का यह भी दावा है कि कई स्थानों पर जीएम लैंड की एनओसी एवं जमाबंदी से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं हैं। साथ ही कई परियोजना स्थलों पर सूचना पट्ट भी नहीं लगाए गए हैं, जबकि सरकारी योजनाओं में परियोजना की लागत, उद्देश्य एवं अन्य जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना आवश्यक होता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के माध्यम से योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा है, जिससे वास्तविक मजदूरों को रोजगार एवं उचित मजदूरी नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि पिछले पांच वर्षों में सामाजिक वानिकी के तहत हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई गड़बड़ियां और वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।

मामले में विभागीय पक्ष जानने के लिए सामाजिक वानिकी विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मजदूरी भुगतान का सत्यापन करने, भूमि अभिलेखों की जांच कराने तथा सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि सामाजिक वानिकी जैसी जनहितकारी योजनाओं की सफलता के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक निगरानी अत्यंत आवश्यक है।

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