जागता झारखंड संवाददाता बसंत कुमार गुप्ता गुमला । गुमला जिला को रेल लाइन से जोड़ने की योजना अधर में लटकी हुई है ।जबकि पिछले कई दशकों से राजनीतिक और सामाजिक संगठन के लोगों के द्वारा रेल लाइन से जोड़ने की मांग की जाती रही ।इसके लिए प्रशासन और सरकार के द्वारा सर्वे भी किया जा चुका है।लोक सभा चुनाव से पूर्व भाजपा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत और पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव के द्वारा गुमला को रेल लाइन से जोड़ने के लिए सहमति प्रदान करने की चर्चा जोर पकड़ी हुई थी। भाजपा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत और पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव के द्वारा रेल मंत्री से मुलाकात कर गुमला को रेल लाइन से जोड़ने का मांग किया गया था। लेकिन भाजपा नेताओं के प्रयास सिफर ही साबित हुए हैं। आज तक रेल लाइन बिछाने को लेकर ना कोई प्रस्ताव पास हुआ और ना ही बजट ही मिल पाई है ऐसे में रेल लाइन का सपना गुमला जिले की जनता के लिए सिर्फ छलावा साबित हुआ है। जब कभी भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव नजदीक आते हैं तो राजनीतिक पार्टियां रेल लाइन को लेकर चुनावी एजेंडे में शामिल जरूर करते हैं। लेकिन जब चुनाव समाप्त हो जाता है तो रेल लाइन का मुद्दा भी शांत हो जाता है। आदिवासी बहुल गुमला जिले के विकास में रेल लाइन यातायात व्यवस्था काफी मददगार हो सकता है। लेकिन यहां की राजनीतिक पार्टियां, कार्यकर्ता समर्थक रेल लाइन को सिर्फ चुनाव का एजेंडा ही बनाकर अपना उल्लू सीधा करते रहे हैं।
गुमला जिले को रेल लाइन से जोड़ने की योजना अधर में , लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे में होती है रेल लाइन, चुनावी मुद्दा बनाकर अपनी उल्लू सीधा करते रहे हैं प्रत्याशी,
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