जागता झारखंड दुमका ब्यूरो।उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने गुरुवार को जिला कोषागार कार्यालय का औचक निरीक्षण कर वित्तीय कार्यप्रणाली की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कोषागार पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को सरकारी विभागों तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (डीडीओ) द्वारा राशि निकासी एवं भुगतान की प्रक्रिया पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने कहा कि जिला की वित्तीय व्यवस्था में कोषागार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक डीडीओ द्वारा प्रस्तुत बिल का कोषागार संहिता के नियमों के अनुरूप सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि राशि की निकासी प्राप्त आवंटन एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही हो।
उन्होंने कर्मियों के वेतन एवं मानदेय भुगतान की प्रक्रिया की भी समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि स्थापना कर्मियों के नाम, पदनाम, जन्म तिथि एवं अन्य आवश्यक विवरणों का मिलान ऑनलाइन अभिलेख अथवा सर्विस बुक से किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित कर्मी कार्यालय में वास्तविक रूप से कार्यरत हों। उपायुक्त ने कहा कि सभी कर्मियों को वेतन भुगतान पे-स्लिप अथवा सर्विस बुक में अंकित लेखा सत्यापन के आधार पर ही किया जाए।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने जिला कोषागार कार्यालय की कार्यप्रणाली, अभिलेख संधारण एवं भुगतान प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इसके उपरांत उपायुक्त ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) कार्यालय का भी औचक निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए जिले में संभावित पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए संचालित नियंत्रण कक्ष की कार्यप्रणाली एवं प्रगति की समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आमजनों से प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निष्पादन समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के निष्पादन में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने नियंत्रण कक्ष में कार्यरत ऑपरेटरों से उनके दायित्वों एवं दैनिक कार्यों की जानकारी प्राप्त की तथा शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए सतर्क एवं सक्रिय रहने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रण कक्ष में प्राप्त शिकायतों एवं उनके निष्पादन से संबंधित प्रतिदिन का विवरण नियमित रूप से पंजी में संधारित किया जाए तथा इसकी सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
मौके पर उप विकास आयुक्त सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।


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