जागता झारखंड ब्यूरो चीफ मीर उबैद उल्लाह लोहरदगा :राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के निर्देशानुसार और पीडीजे सह अध्यक्ष डालसा लोहरदगा राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में 09 मई 2026 को वर्ष का द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, लोहरदगा द्वारा सिविल कोर्ट परिसर में किया गया। इसके पूर्व व्यवहार न्यायालय, रांची में झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष एवं झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठम न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन किया। वहीं वर्चुअल उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष राजकमल मिश्रा और डालसा सचिव मनोरंजन कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े। वहीं पीडीजे सह अध्यक्ष डालसा ने राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बनाए गए विभिन्न बैंचों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम है। लोगों में प्रेम, शांति, समृद्धि व समरसता बनी रहे यही इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य है।
वहीं आंकड़ों की जानकारी देते हुए डालसा सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए कुल छह बेचों का गठन किया गया था। बेंच संख्या एक में विद्युत संबंधी मामले डीजे प्रथम श्री स्वयंभू के नेतृत्व में, बेंच संख्या दो में पारिवारिक, एमएसीटी, क्रिमिनल अपील, सिविल अपील, मेट्रिमोनियल केसेज के मामले डीजे द्वितीय श्रीमती नीरजा असरी के नेतृत्व में, बेंच संख्या तीन में क्रिमिनल कंपाउंडबल, माइंस एंड मिनरल्स, फॉरेस्ट एक्ट, एनआई एक्ट, एमवी एक्ट, एक्साइज केसेस आदि के मामले सीजेएम सह एसीजेएम श्री केके मिश्रा के नेतृत्व में, बेंच संख्या चार में बीएसएनल, बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंक से संबंधित मामले श्री रोहित कुमार सिविल जज सीनियर डिवीजन सह जेएम प्रथम क्लास के नेतृत्व में, बेंच संख्या पांच सभी सिविल केस, ग्रामीण बैंक, अलाहाबाद बैंक, एसबीआई, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक से संबंधित मामले एसडीजेएम श्री अमित कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जबकि बेंच संख्या छह कंज्यूमर फोरम, म्युनिसिपल लॉ, लेबर लॉ, रेवेन्यू केसेज सहित अन्य मामले सदस्य कंज्यूमर फोरम मिस पूनम सुनीता बाडा के नेतृत्व में गठित किया गया था। वहीं आयोजन में कुल 1354 वादों का निष्पादन किया गया। साथ ही 13290142 रुपए का राजस्व प्राप्त हुई। वहीं निस्तारित किए गए वादों में कुल 140 वाद विभिन्न न्यायालयों में लंबित थे।


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