PTG योजना में बड़ा घोटाला! खाली बोरों से हर महीने 3-4 लाख की कमाई का दावा
जागता झारखंड संवाददाता पाकुड़। जिला अंतर्गत आदिम जनजाति (PTG) समूह के लिए संचालित खाद्यान्न वितरण योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और खाली जूट बोरों की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि पाकुड़ के सभी छह प्रखंडों में खाली जूट के बोरों को लेकर हर महीने लाखों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पीटीजी (PTG) योजना के तहत Food Corporation of India (FCI) के माध्यम से जूट के बोरों में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद पाकुड़ जिले के सभी छह प्रखंडों में Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) के जरिए इस अनाज को प्रखंड स्तरीय गोदामों में 35 किलो के प्लास्टिक बोरों में री-पैकिंग किया जाता है, ताकि इसे पहाड़िया लाभुकों के घर-घर तक पहुंचाया जा सके।
लाखों की कालाबाजारी का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि एफसीआई से आए जूट के वे असली खाली बोरे आखिर कहां जा रहे हैं? आशंका जताई जा रही है कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) और सहायक गोदाम प्रबंधक की मिलीभगत से इन कीमती जूट बोरों की खुले बाजार में कालाबाजारी की जा रही है। बाजार मूल्य के अनुसार, इन खाली बोरों की हेराफेरी से हर महीने करीब 3 से 4 लाख रुपये की अवैध कमाई किए जाने का दावा किया गया है।लिट्टीपाड़ा सहित जिले के सभी छह प्रखंडों में यदि खाद्यान्न लाभुकों के घर तक पहुंचाया गया है, तो उन खाली जूट बोरों का हिसाब क्या है? अगर पिछले सभी वर्षों के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो, तो करोड़ों के इस घोटाले की सच्चाई उजागर हो जाएगी।" — सुरेश कुमार अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता
अग्रवाल ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार गरीबों तक अनाज पहुंचाने के लिए भारी संसाधन खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी और बिचौलिए खाली बोरों की बिक्री कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं।


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