जागता झारखंड संवाददाता पाकुड़ :- जिला के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक अजीबोगरीब खेल चल रहा है। जहाँ आम जनता भीषण गर्मी और बिजली की कटौती से त्रस्त है, वहीं रात के अंधेरे में कुछ रसूखदार क्रेशर संचालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से काम जारी रखे हुए हैं। ताजा मामला सामने आया है जहाँ बताया जा रहा है कि एक रसूखदार व्यक्ति ' यादव' (कथित तौर पर) का क्रेशर रात भर गर्जना कर रहा है, जबकि पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकुड़ बिजली विभाग की मिलीभगत से रात के समय आम उपभोक्ताओं की बिजली काट दी जाती है या वोल्टेज कम कर दिया जाता है, ताकि उस बिजली की खपत को बड़े-बड़े क्रेशरों और खदानों की ओर मोड़ दिया जाए। जब शहर और गाँव की गलियां अंधेरे में होती हैं, तब इन क्रेशरों में लगी हाई-वोल्टेज लाइटें और भारी मशीनें रात के सन्नाटे को चीरते हुए चलती रहती हैं। नियमों के मुताबिक, रिहायशी इलाकों के आसपास क्रेशरों के संचालन का एक निश्चित समय होता है। रात के समय मशीनों का चलना न केवल ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) फैलाता है, बल्कि उड़ती हुई धूल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सूत्र बताते हैं कि पाकुड़ जिले के कई खदान और क्रेशर रात को भी काम जारी रखते हैं, ताकि अवैध खनन और ओवरलोडिंग को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जा सके। सवाल यह उठता है कि जब पूरा जिला प्रशासन और खनन विभाग सजग होने का दावा करता है, तो रात के समय इन मशीनों की गूंज उन तक क्यों नहीं पहुँचती? क्या बिजली विभाग को यह नहीं पता कि लोड कहाँ जा रहा है? यादव जैसे रसूखदार लोगों के नाम सामने आने के बावजूद कार्रवाई न होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस पूरे मामले पर संबंधित विभागों के अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, बिजली कटौती से परेशान जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार बिजली बचाने की बात करती है, दूसरी तरफ रसूखदारों के लिए जनता के हक की बिजली की बलि दी जा रही है। क्षेत्र की जनता अब जिला कलेक्टर (DC) और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग कर रही है कि इन अवैध रूप से रात में चल रहे क्रेशरों पर छापेमारी की जाए और बिजली की चोरी/डायवर्जन की निष्पक्ष जांच हो। क्या प्रशासन इन रसूखदारों पर लगाम कसेगा या पाकुड़ की जनता ऐसे ही अंधेरे और शोर में जीने को मजबूर रहेगी?
जागता झारखंड संवाददाता पाकुड़ :- जिला के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक अजीबोगरीब खेल चल रहा है। जहाँ आम जनता भीषण गर्मी और बिजली की कटौती से त्रस्त है, वहीं रात के अंधेरे में कुछ रसूखदार क्रेशर संचालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से काम जारी रखे हुए हैं। ताजा मामला सामने आया है जहाँ बताया जा रहा है कि एक रसूखदार व्यक्ति ' यादव' (कथित तौर पर) का क्रेशर रात भर गर्जना कर रहा है, जबकि पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकुड़ बिजली विभाग की मिलीभगत से रात के समय आम उपभोक्ताओं की बिजली काट दी जाती है या वोल्टेज कम कर दिया जाता है, ताकि उस बिजली की खपत को बड़े-बड़े क्रेशरों और खदानों की ओर मोड़ दिया जाए। जब शहर और गाँव की गलियां अंधेरे में होती हैं, तब इन क्रेशरों में लगी हाई-वोल्टेज लाइटें और भारी मशीनें रात के सन्नाटे को चीरते हुए चलती रहती हैं। नियमों के मुताबिक, रिहायशी इलाकों के आसपास क्रेशरों के संचालन का एक निश्चित समय होता है। रात के समय मशीनों का चलना न केवल ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) फैलाता है, बल्कि उड़ती हुई धूल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सूत्र बताते हैं कि पाकुड़ जिले के कई खदान और क्रेशर रात को भी काम जारी रखते हैं, ताकि अवैध खनन और ओवरलोडिंग को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जा सके। सवाल यह उठता है कि जब पूरा जिला प्रशासन और खनन विभाग सजग होने का दावा करता है, तो रात के समय इन मशीनों की गूंज उन तक क्यों नहीं पहुँचती? क्या बिजली विभाग को यह नहीं पता कि लोड कहाँ जा रहा है? यादव जैसे रसूखदार लोगों के नाम सामने आने के बावजूद कार्रवाई न होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस पूरे मामले पर संबंधित विभागों के अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, बिजली कटौती से परेशान जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार बिजली बचाने की बात करती है, दूसरी तरफ रसूखदारों के लिए जनता के हक की बिजली की बलि दी जा रही है। क्षेत्र की जनता अब जिला कलेक्टर (DC) और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग कर रही है कि इन अवैध रूप से रात में चल रहे क्रेशरों पर छापेमारी की जाए और बिजली की चोरी/डायवर्जन की निष्पक्ष जांच हो। क्या प्रशासन इन रसूखदारों पर लगाम कसेगा या पाकुड़ की जनता ऐसे ही अंधेरे और शोर में जीने को मजबूर रहेगी?


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