जागता झारखंड संवाददाता पाकुड़: डीपबोरिंग के नाम पर केवल चापाकल लगाना जनता के साथ खिलवाड़ सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने पाकुड़ शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन की कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, पाकुड़ के कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा है कि विभाग की दृष्टि में 'डीप बोरिंग' की वास्तविक परिभाषा क्या है? पाइपलाइन विस्तार के बिना डीप बोरिंग का औचित्य नहीं सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि पाकुड़ एक शहरी क्षेत्र है और यहाँ के मोहल्लावासी आधुनिक जलापूर्ति सुविधाओं के हकदार हैं। उन्होंने तर्क दिया कि डीप बोरिंग का वास्तविक अर्थ केवल एक बोरिंग कर चापाकल लगा देना नहीं है, बल्कि उस बोरिंग के माध्यम से पूरे मोहल्ले में पाइपलाइन का विस्तार कर हर घर तक पानी पहुँचाना होना चाहिए। केवल एक चापाकल गाड़ देने से उसे डीप बोरिंग योजना कहना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से गलत है। श्याम नगर की योजना पर उठाए सवाल
उन्होंने विशेष रूप से श्याम नगर में स्वीकृत योजना (लागत: ₹4,08,299) का हवाला देते हुए कहा पाकुड़ नगर परिषद् शहरी क्षेत्र , वार्ड नंबर 15 में 24 दिसंबर मंगलवार को वहाँ जो चापाकल लगाया गया है, वह जनता की उम्मीदों के विपरीत है। श्री अग्रवाल ने तीखे शब्दों में कहा:
यदि डीप बोरिंग के नाम पर केवल चापाकल ही देना था, तो विभाग उसे वापस खोल ले। मोहल्लेवासी केवल एक चापाकल का क्या करेंगे? शहरी क्षेत्र में लोगों को पाइपलाइन के जरिए पानी की सुविधा मिलनी चाहिए, जिसके लिए आवेदन दिया गया था। नई योजनाओं की स्वीकृति पर जताया हर्ष
हालांकि, उन्होंने समाहरणालय पाकुड़ (जिला योजना शाखा) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत अन्य जलापूर्ति योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान किए जाने पर प्रसन्नता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि ये योजनाएं अपने वास्तविक स्वरूप (पाइपलाइन विस्तार) के साथ धरातल पर उतरती हैं, तो इससे आम जनता और मोहल्लावासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
अंत में, उन्होंने प्रशासन से मांग की कि योजनाओं की लागत के अनुरूप गुणवत्ता और सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाए ताकि सरकारी धन का सही सदुपयोग हो सके।


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