माफियाओं के हौसले बुलंद, पुलिस का खौफ खत्म, अब बच्चों के बस्ते तक पहुँचा मौत का सामान

बर्बाद होता बचपन, सोता प्रशासन, घाघरा थाना बना मूकदर्शक, गलियों में सरेआम ब्राउन शुगर का तांडव जागता झारखंड संवाददाता बजरंग कुमार महतो घाघरा (गुमला) :- घाघरा प्रखंड में ब्राउन शुगर और सूखे नशे का कारोबार अब किसी गुप्त गलियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक समानांतर अर्थव्यवस्था का रूप ले चुका है। विडंबना देखिए कि जिस पुलिस के कंधों पर कानून की रक्षा का भार है, उसकी नाक के नीचे मौत का सामान सरेआम बिक रहा है। थाना प्रशासन की यह निष्क्रियता अब क्षेत्र के लोगों के लिए मिलीभगत का संदेह पैदा कर रही है। स्कूली बस्ते में जहर, सड़कों पर आतंक नशे के सौदागरों ने अब मासूम स्कूली बच्चों को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाना शुरू कर दिया है। चांदनी चौक जैसे व्यस्त बाजार में दुकानों के भीतर से लेकर गली-मोहल्लों तक ड्रग्स पेडलर बेखौफ घूम रहे हैं। स्थिति यह है कि नशे की तलब पूरी करने के लिए बच्चे अपराधी बन रहे हैं। पहले घर की छोटी-मोटी चोरी और अब पड़ोसियों के घरों में सेंधमारी घाघरा में अपराध का ग्राफ रॉकेट की रफ्तार से ऊपर जा रहा है। पुलिस का रौब खत्म, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम पुलिस की कार्यक्षमता को चुनौती दे रहे हैं। पेडलर्स का यह कहना कि पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा है, नेतरहाट रोड पर रात भर नशेड़ियों का तांडव और घरों पर पत्थरबाजी की घटनाएं आम हो चुकी हैं, लेकिन घाघरा पुलिस एफआईआर और कार्रवाई के बजाय टालमटोल की मुद्रा में है। गंभीर सवाल, सप्लाई चेन का आका और सफेदपोश माफिया कौन है ग्रामीणों का आक्रोश, हम थाने रिपोर्ट करने जाते हैं तो हमें ही टरका दिया जाता है। क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी या किसी की जान जाने का इंतजार कर रही है। अगर छोटे-छोटे पेडलर जेब में ड्रग्स लेकर घूम रहे हैं, तो पुलिस की खुफिया इकाई क्या सो रही है। इतनी बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर की खेप घाघरा पहुंच कैसे रही है आखिर वह सफेदपोश कौन है जो इन अपराधियों को संरक्षण दे रहा है। कार्रवाई का दिखावा क्यों, वक्त आ गया है सर्जिकल स्ट्राइक का अखबारों में सुर्खियां बनने के बावजूद अब तक किसी बड़े माफिया पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया। घाघरा की जनता अब आश्वासनों से थक चुकी है। जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधिकारियों को इस स्लो पॉइजन के खिलाफ तत्काल विशेष अभियान चलाने की जरूरत है। यदि समय रहते ड्रग्स सिंडिकेट को ध्वस्त नहीं किया गया, तो घाघरा का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा।

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