आजादी के 78 वर्ष बाद भी अंधेरे में जीने को मजबूर घाघरा प्रखंड के कई गांव

जागता झारखंड संवाददाता बजरंग कुमार महतो घाघरा (गुमला): देश को आजाद हुए 78 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन घाघरा प्रखंड के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधा बिजली से वंचित हैं। यहां के ग्रामीण आज भी अंधेरे में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधकार में डूब जाता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। कुछ गांवों में सोलर प्लांट तो लगाए गए हैं, परंतु रखरखाव के अभाव में वे नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं। कई स्थानों पर दिन में या रात में मात्र एक से दो घंटे ही रोशनी मिल पाती है, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वहीं रात के समय जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का डर हमेशा बना रहता है। मोबाइल चार्जिंग, पंखा, टीवी और अन्य जरूरी उपकरणों का उपयोग न कर पाने से ग्रामीण खुद को विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब देश डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब घाघरा प्रखंड के गांवों का आज भी अंधेरे में रहना सरकारी विकास दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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