जागता झारखंड दुमका ब्यूरो। नेपाल से आए संथाल आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल ने आज संताल परगना के ऐतिहासिक स्थल संताल काटा पोखर का भ्रमण किया। तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन यह मंडल भारत सेवाश्रम संघ प्रणवानंद सेवा सदन, पथरा रानेश्वर पहुंचा, जहां स्कूली बच्चों ने नगाड़ा-मांदर की धुन पर संताली रीति-रिवाज से जोरदार स्वागत किया।प्रतिनिधिमंडल ने जाहेर थान में सामूहिक बोंगा-बुरू पूजा की, उसके बाद छात्रों, शिक्षकों और मेहमानों के बीच भारत-नेपाल के संथालों की भाषा, संस्कृति व परंपराओं पर लंबी चर्चा हुई। इसके बाद वे 1855 के सिदो-कान्हू मुर्मू विद्रोह से जुड़े ऐतिहासिक स्थल संताल काटा पोखर (दिगुली, रानेश्वर प्रखंड) पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने हर्षोल्लास से स्वागत कर ऐतिहासिक घटनाओं को ताजा किया।दिसोम मांझी बाबा विनीलाल टुडू के निर्देशन में सुनील मरांडी व सिमोन मरांडी नेतृत्व कर रहे हैं। मंडल आसपास के गांवों व मांझी थान प्रतिनिधियों के साथ संध्या बैठकें कर रहा है, जहां भाषा-संस्कृति का आदान-प्रदान हो रहा। नेपाल के मांझी बाबा सोम हांसदा ने कहा, "भारत अत्यंत सुंदर है और यहां के लोग उससे भी अच्छे। हम भारत के संथालों के पर्व-त्योहार व पूजा पद्धति को नेपाल में लागू करेंगे, ताकि विश्व स्तर पर संथाल संस्कृति में एकरूपता आए।"यह दौरा संथाल समुदाय की साझा विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


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