जागता झारखंड संवाददाता विक्की कुमार चैनपुर गुमला
चैनपुर: चैनपुर प्रखंड के ग्राम घोरहठी जनावल में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 11 वर्षीय मासूम बच्ची बेरोनिका तिग्गा, पिता फिल्मोन तिग्गा, सर्पदंश का शिकार हो गई। घटना सुबह करीब 6:30 बजे की है, जब कक्षा 5 में पढ़ने वाली बेरोनिका अपने स्कूल, आर.सी. प्राइमरी स्कूल जनावल जा रही थी।परिजनों के अनुसार, रोज की तरह बेरोनिका सुबह साढ़े छह बजे स्कूल के लिए निकली थी। इसी दौरान रास्ते में उसे एक जहरीले सांप ने डस लिया। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल की प्रिंसिपल अंजली टोप्पो और बच्ची के पिता फिल्मोन तिग्गा ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर पहुंचाया।पीड़ित बच्ची के पिता फिल्मोन तिग्गा ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वे सुबह करीब 9:30 बजे बच्ची को लेकर सीएचसी चैनपुर पहुँचे, तो वहाँ कोई भी डॉक्टर उपस्थित नहीं था।पीड़ित बच्ची के पिता फिल्मोन तिग्गा ने बताया कि "अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। वहाँ तैनात नर्सों और एएनएम द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से डॉक्टरों से संपर्क किया गया और फोन पर मिले निर्देशों के आधार पर ही बच्ची का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया।"पिता ने बताया कि फोन पर बातचीत के जरिए इलाज होने के कारण बच्ची की स्थिति लगातार दयनीय बनी हुई थी और एम्बुलेंस मिलने में भी काफी देरी हुई।मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया। इस बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर स्थिति और इलाज में हो रही देरी से परेशान होकर पिता फिल्मोन तिग्गा ने एक लिखित पत्र देकर बच्ची को आगे के इलाज के लिए अपनी जिम्मेदारी पर ले जाने का फैसला किया।पिता ने लिखित रूप में दिया है कि वे अपनी बेटी बेरोनिका को अपनी मर्जी से ले जा रहे हैं और यदि बच्ची के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके जिम्मेदार अस्पताल के डॉक्टर या नर्स नहीं बल्कि वे स्वयं होंगे।फिलहाल बच्ची की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और इस प्रकार फोन पर इलाज किए जाने की घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



एक टिप्पणी भेजें