जागता झारखंड संवाददाता शिकारीपाड़ा (दुमका):
शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत लखनपुर गांव के करनाबागान में मोहर्रम पर्व के अवसर पर पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न गांवों के ताजिया लाइसेंसधारियों ने पहले अपने-अपने गांवों में ताजिया जुलूस निकाला। इसके बाद सभी जुलूस करनाबागान मेला स्थल के लिए रवाना हुए, जहां ताजिया मिलान की परंपरा निभाई गई। साथ ही अखाड़ा लगाकर युवाओं ने पारंपरिक युद्धक एवं हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया।
मोहर्रम का पर्व हक, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देता है। यह पर्व इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। करबला की घटना सत्य, न्याय, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि मोहर्रम केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और मानवता का भी संदेश देने वाला पर्व माना जाता है।
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि करनाबागान का यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। उनके अनुसार, पहले इस मेले में लगभग 20 से 25 गांवों से ताजिया जुलूस पहुंचते थे और बड़े पैमाने पर ताजिया मिलान होता था। हालांकि समय के साथ इसमें कमी आई है और अब केवल दो-चार गांवों के ताजिया ही मेले में पहुंचकर इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस वर्ष भी मेले में अच्छी-खासी भीड़ उमड़ी और विभिन्न दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की।
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए शिकारीपाड़ा थाना की पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रही। पुलिस की निगरानी में पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।



एक टिप्पणी भेजें