री एडमिशन का रैकेट : निजी स्कूल बने लुटेरे




विकास शुल्क से किताब तक लूट, अभिभावकों का सवाल कब जागेगा प्रशासन ?

जागता झारखंड संवाददाता बजरंग कुमार महतो संवाददाता घाघरा (गुमला) :- घाघरा प्रखंड क्षेत्र में निजी स्कूलों की मनमानी अब खुलकर सामने आने लगी है । प्रखंड के सभी निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र के बहाने अभिभावकों की जेब काटने में जुटे हैं । री एडमिशन के नाम पर हर साल मोटी फीस वसूलना अब खुला खेलबन गया है । एक ही स्कूल में पढ़ रहे नियमित छात्रों से दोबारा एडमिशन शुल्क लेना आम हो चुका है, जिससे अभिभावक आक्रोश से तिलमिला उठे हैं । अभिभावकों का आरोप है कि यह केवल फीस वसूली नहीं, बल्कि एक संगठित "री - एडमिशन रैकेट" है, जहां मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे हजारों रुपए वसूले जा रहे हैं ।

ब्लैकमेल का खुला खेल, फीस दो वरना नाम कटेगा

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन खुले आम दबाव डालते हैं - फ्री एडमिशन फीस नबी को बच्चों का नाम काट देंगे । एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पढ़ाई नहीं, सीधा ब्लैकमेल है । वहीं दूसरे अभिभावक ने कहा कि री - एडमिशन शुल्क, विकास शुल्क, किताब कॉपी आदि के नाम पर लगातार आर्थिक भोज डाला जा रहा है । सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक यह सिलसिला चलता रहेगा और क्या स्कूलों को खुली छूट मिल गई है ?

हर निजी स्कूल का नया बहाना नई लूट, अभिभावक मजबूर स्कूल मालामाल

घाघरा के हर छोटे बड़े सभी निजी स्कूलों में यही हाल है । कहीं री - एडमिशन फीस, कहीं एनुवल चार्ज, कहीं विकास शुल्क, तो कहीं मेंटेनेंस फीस के नाम पर हजारों रुपए की अवैध वसूली किया जा रहा है । जिससे अभिभावकों पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ता जा रहा है । स्कूल अब शिक्षा मंदिर कम वसूली केंद्र ज्यादा लगने लगे हैं । गरीब परिवारों के लिए यह बोझ बहुत ही असहनीय हो गया है ।

सड़क से प्रशासन तक गूंज रही आवाज

इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है । लोगों ने घागरा एवं गुमला प्रशासन से मांग की है कि री एडमिशन फीस पर तत्काल रोक लगाई जाए । सभी निजी स्कूलों की जांच हो तथा दोषी स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए । अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई तो घाघरा में शिक्षा नहीं सिर्फ लूट की पढ़ाई चलती रहेगी और अभिभावक यूं ही शोषण के शिकार बनते रहेंगे ।

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