जागता झारखंड संवाददाता विक्की कुमार चैनपुर/गुमला
चैनपुर (गुमला): वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत बनी हुई है। आलम यह है कि प्रखंड में स्थित एकमात्र पेट्रोल पंप पर तेल उपलब्ध न होने के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।स्थानीय लोगों को अपनी गाड़ियों और कृषि मशीनों के लिए तेल जुटाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। लोग मांझटोली लगभग 30 किमी, डुमरी लगभग 15 किमी और जारी लगभग 10 किमी की दूरी तय कर तेल लाने को मजबूर हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि अतिरिक्त खर्च का बोझ भी आम जनता पर पड़ रहा है।चैनपुर एक सुदूरवर्ती क्षेत्र है जहाँ की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है। वर्तमान में साग-सब्जी की खेती और पटवन (सिंचाई) का समय है, ऐसे में डीजल न मिलने से खेतों तक पानी पहुँचाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है।दूसरी ओर, मजबूरन लोग स्थानीय 'खुला दुकानों' ब्लैक मार्केट से ऊँचे दामों पर पेट्रोल-डीजल खरीदने को विवश हैं। खुले बाजारों में मोटी रकम वसूली जा रही है, जिससे वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।तेल की इस किल्लत पर जब स्थानीय पेट्रोल पंप मालिक से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फ़ोन रिसीव नहीं किया। इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष प्रमोद खलखो ने कहा चैनपुर में केवल एक पेट्रोल पंप होने के कारण स्थिति पहले से ही संवेदनशील थी, और अब तेल की अनुपलब्धता ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का बहाना बनाकर आपूर्ति रोकना या कालाबाजारी को बढ़ावा देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर आपूर्ति सुचारु करनी चाहिए। जिला परिषद मेरी लकड़ा ने कहा छतरपुर स्थित गणपति बप्पा पेट्रोल पंप के मालिक से हमने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ग्रामीणों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार और तेल की कृत्रिम किल्लत एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि संकट के इस समय में पेट्रोल पंप मालिक ने चुप्पी साध ली है। स्थानीय स्तर पर संपर्क करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिससे 'कृत्रिम किल्लत' की आशंका और गहरा गई है।



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