जागता झारखंड :आज पूरी दुनिया के हुक्मरान (शासक) अराजकता और जंगजूई (युद्धप्रियता) के जुनून में पागल हो रहे हैं। जबकि हर जंग और हर लड़ाई का आखिरी चरण आपसी समझौते और सुलह पर निर्भर है। आज पूरी दुनिया एक-दूसरे के खून की प्यासी नजर आ रही है। मगर ये सारी जंगें सिर्फ और सिर्फ तेल के लिए, गैस के लिए, आर्थिक लाभ के लिए और अपने प्रभुत्व को दूसरों से मनवाने के लिए हो रही हैं। अगर अरब के शेखों ने समझदारी से काम न लिया तो एशिया के लोग, उपमहाद्वीप के लोगों को ताजा निवाला बनाकर खा जाएंगे और हमेशा के लिए उनका नाम-ओ-निशान मिटा कर ही दम लेंगे। हमारी गुज़ारिश सऊदी हुक्मरानों और वहां के शेखों से है कि आप अमेरिकी राष्ट्रपति महोदय के स्वागत के लिए अपनी बच्चियों के साथ 'रक्स-ए-इब्लीस' (शैतानी नृत्य) न करें और उनका डांस न करवाएं। इसलिए कि पूरी दुनिया के सामने आपकी इस्लामी तहजीब (संस्कृति) और संस्कृति का ह्रास होता है। इससे इस्लाम की शान नहीं बढ़ती, बल्कि इस्लाम की छवि बिगड़ती है। ट्रंप साहब जब आते हैं तो आप अपनी बच्चियों को उनके सामने नृत्य करने के लिए मजबूर करते हैं। क्या यही आपका अतीत का इतिहास है? क्या यही आपका कल्चर है? क्या यही आपकी तहजीब है? क्या यही आपका इस्लाम का इतिहास है? आपकी इस हरकत से पूरी दुनिया के मुसलमानों को शर्मिंदा होना पड़ता है। जो चीज आप अपनी तहजीब समझते हैं, वह तहजीब नहीं है, वह 'रक्स-ए- इब्लीस' है। आपको ट्रंप की मदद चाहिए, आप व्यक्तिगत तौर पर कुछ भी करें, मगर अपनी बच्चियों को कम से कम मजबूर न करें कि वे उनके सामने नाचने पर मजबूर हो जाएं। अगर आपने इस गंदी हरकत से अपने आप को नहीं संभाला, तो पूरी दुनिया के स्तर से मुसलमानों की तहजीब का खात्मा हो जाएगा, जो कि अत्यंत दुखद बात है। अल्लामा जाबिर हुसैन सिद्दीकी ने अफसोस जताते हुए बताया कि सऊदी शेखों के कारनामे पूरी दुनिया में मुसलमानों के लिए शर्म की वजह बने हुए हैं। काश उन्हें शर्म आ जाती! काश वे इस्लाम के अतीत के इतिहास का अध्ययन कर लेते! रसूल-ए- मोहतरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं का अध्ययन करते तो उन्हें इस तरह से बेशर्मी और बेहयाई के काम करने पर अपने आप पर शर्म जरूर आती।
काबा किस मुँह से जाओगे 'गालिब',
शर्म तुमको मगर नहीं आती...


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