फर्जी यूनियन संचालन और ब्लैकमेलिंग का आरोप, एसपी से उच्चस्तरीय जांच की मांग




जागता झारखंड दुमका ब्यूरो। फर्जी श्रमिक यूनियन के नाम पर पत्र जारी कर अधिकारियों पर दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग करने के गंभीर आरोपों को लेकर दुमका पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई है। यह शिकायत लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संथाल परगना प्रमंडल प्रभारी मनोज कुमार राय ने लिखित रूप से की है।

शिकायत पत्र में कहा गया है कि हाल ही में विभिन्न अज्ञात स्रोतों के माध्यम से इंटक श्रमिक यूनियन के नाम से जारी एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसकी छायाप्रति भी संलग्न की गई है। आरोप है कि यह पत्र इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के लेटर पैड पर मितन दास, जो स्वयं को उपाध्यक्ष बताते हैं, द्वारा जारी किया गया है। मितन दास का पता ग्राम इन्द्रबनी, पोस्ट पत्ताबाड़ी, थाना शिकारीपाड़ा, जिला दुमका बताया गया है।

शिकायत के अनुसार, उक्त पत्र में नागेन्द्र ततवा, पिता लक्ष्मण ततवा, निवासी ग्राम- पोस्ट- थाना जरमुंडी, जिला दुमका के माध्यम से यूनिट 112 आरसीसी के मेजर अमोल हजारे पर 24 लाख 30 हजार रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। मनोज कुमार राय ने अपने आवेदन में आशंका जताई है कि फर्जी यूनियन (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) के नाम पर पत्र जारी कर बीआरओ (बिआरओ) के अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, ताकि उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि बीआरओ में कार्यरत प्रवासी मजदूरों पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं। साथ ही, इससे वास्तव में सक्रिय और वैध यूनियनों को भी अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नागेन्द्र ततवा के खिलाफ पहले भी मजदूर शोषण और अवैध धन उगाही से जुड़े कई आरोप सामने आ चुके हैं। हाल के दिनों में भी उनके द्वारा मजदूर भर्ती के नाम पर अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें मिलने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो मितन दास और उनके सहयोगी नागेन्द्र ततवा के खिलाफ विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाए।

मनोज कुमार राय ने यह भी मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार की फर्जी यूनियन संचालन, धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे और मजदूरों के हितों की रक्षा हो सके।


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