प्रतिनिधि, जगता झारखंड, कटिहार (बिहार):- बिहार का शिक्षा विभाग अपनी कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है, लेकिन इस बार कटिहार जिले से जो मामला सामने आया है, उसने पूरी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि अधिकारियों ने उन शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांग लिया है जिनका निधन काफी समय पहले हो चुका है। इतना ही नहीं, अनुशासन का डंडा चलाते हुए विभागीय फाइलों में 'लापरवाह' घोषित कर इन मृत शिक्षकों का वेतन भी रोक दिया गया है।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब विभाग द्वारा जारी की गई स्पष्टीकरण की सूची सार्वजनिक हुई। इस सूची में उन नामों को देखकर स्थानीय लोग और शिक्षक संघ दंग रह गए जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। विभाग की इस गंभीर चूक ने यह साबित कर दिया है कि कार्यालय में बैठ कर कागजी घोड़े दौड़ाने वाले अधिकारियों को जमीनी हकीकत और सेवा पुस्तिका (Service Book) के अपडेशन की कोई परवाह नहीं है। बिना किसी भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच किए, आनन-फानन में फरमान जारी करने की इस प्रवृत्ति ने विभाग की जमकर किरकिरी कराई है।
स्थानीय निवासियों और शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि मृत आत्माओं और उनके शोकाकुल परिजनों का अपमान है। एक तरफ जहां परिजन अनुकंपा के लाभ के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग उन्हें 'कार्य में अनुपस्थित' मानकर दंडित कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद अब जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और आला अधिकारी अपनी साख बचाने के लिए इस पर सफाई देने से बच रहे हैं।


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