माह-ए-रमज़ान आत्म-शुद्धि (तज़किया-ए-नफ्स) का महीना है: जाबिर हुसैन सिद्दीक़ी

 


जागता झारखंड : रमज़ान शरीफ़ अल्लाह तआला की वह महान नेमत है, जिसे पूरी दुनिया के अहले-ईमान के लिए बेपनाह मुक़द्दस और मुबारक बनाकर भेजा गया है। इस मुबारक महीने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें तीन अशरे होते हैं। रहमत, मग़फिरत और निजात। रमज़ान का हर एक लम्हा अपनी बरकतों और रहमतों के कारण साल के अन्य सभी महीनों से श्रेष्ठ है, क्योंकि अल्लाह तआला ने इस महीने में रोज़ा रखने वालों के लिए असंख्य इनामात रखे हैं।सरकार-ए-दो-आलम हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने रमज़ान शरीफ़ की अज़मत बयान करते हुए फरमाया कि यदि अल्लाह तआला ज़मीन और आसमान को ज़बान दे दे, तो वे हर रोज़ेदार को जन्नत की खुशखबरी देते हुए नज़र आएंगे। कुरआन में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है। “ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए हैं, ताकि तुम मुत्तकी और परहेज़गार बन सको।”नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इस महीने की पवित्रता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रोज़ेदार के मुँह की खुशबू अल्लाह तआला को कस्तूरी (मुश्क) से भी अधिक प्रिय है। अल्लाह तआला ने जन्नत में एक विशेष दरवाज़ा रखा है, जिसे ‘बाब-उर-रैय्यान’ कहा जाता है, और उससे केवल रोज़ेदार ही दाख़िल होंगे। इस्लाम में रोज़े की फ़र्ज़ियत अपनी प्रकृति में सभी धर्मों से अलग और विशिष्ट है।

रमज़ान की अज़मत और पवित्रता से जो व्यक्ति मुँह मोड़ता है, उससे बड़ा नादान कोई नहीं हो सकता। अल्लाह तआला स्वयं फरमाता है।“ऐ मेरे बंदो! मेरी बारगाह में दुआ करके देखो, मैं तुम्हारी तमाम मुरादें और ज़रूरतें पूरी कर दूँगा ।

इस अवसर पर यही दुआ है कि अल्लाह तआला पूरी दुनिया के मुसलमानों को रमज़ान शरीफ़ के इस मुबारक महीने और इसके अशरों से पूरा लाभ उठाने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। अल्लाह हमें रमज़ान की अज़मतों और बरकतों को समझने की समझ दे और हम सभी का ख़ातमा बिल-ख़ैर फरमाए।वास्तव में बड़े खुशनसीब हैं वे लोग, जो रमज़ान में ग़रीबों और मिस्कीनों की मदद करते हैं, क़ुरआन पाक की तिलावत, नमाज़-ए-तरावीह, पाँच वक्त की नमाज़ और तहज्जुद में अधिक से अधिक समय लगाकर अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा हासिल करते हैं। अल्लाह पाक हम सभी को अपने हुक्मों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।



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