झारखंड में पेसा कानून को कैबिनेट की मंजूरी: आदिवासी स्वशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम: अनिल चौधरी

जागता झारखंड संवाददाता गुलाम हैदर जमुआ (गिरिडीह):-झारखंड में अनुसूचित जनजातियों के सशक्तिकरण की दिशा में अबुआ सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। आंकड़ों के अनुसार राज्य की लगभग 27 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति है और ऐसे में पेसा (पंचायतों के लिए प्रावधान विस्तार) अधिनियम को कैबिनेट की मंजूरी मिलना बेहद महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल चौधरी ने कहा कि झारखंड के अधिकांश अनुसूचित जनजाति सुदूर और वन क्षेत्रों में निवास करते हैं, जहां बुनियादी संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे क्षेत्रों में पेसा कानून विकास की नई राह खोलने का काम करेगा। अब जनजातीय क्षेत्रों की पंचायतें और अधिक मजबूत होंगी तथा अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार कर सकेंगी।उन्होंने कहा कि एक सुदृढ़ योजना के अभाव में पिछले 25 वर्षों तक पेसा कानून का अधर में लटका रहना गैर-राजनीतिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। अब इसे लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों को मजबूती देगा, बल्कि स्वशासन की भावना को भी साकार करेगा।अनिल चौधरी ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सकारात्मक प्रयासों के कारण ही आज झारखंड में पेसा कानून वास्तविक रूप ले सका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कानून जनजातीय क्षेत्रों में समावेशी और सतत विकास का आधार बनेगा।

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