ब्राउन शुगर की गिरफ्त में घाघरा प्रखंड टूटते परिवार और बढ़ता अपराध बना बड़ी चुनौती

 


जागता झारखंड संवाददाता बजरंग कुमार महतो घाघरा (गुमला):- गुमला जिले का घाघरा प्रखंड इन दिनों ब्राउन शुगर ,गांजा , एवं अन्य मादक पदार्थों जैसे जानलेवा नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। कभी शांत और सामाजिक समरसता के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका अब नशे के अवैध कारोबार, बढ़ते अपराध और बिखरते पारिवारिक के ताने-बाने का गवाह बनता जा रहा है। ब्राउन शुगर की लत ने युवा और स्कूली बच्चे को सबसे अधिक अपनी चपेट में लिया है, जिससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि पूरे समाज पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है । स्थिति यह है कि नशा अब गलियों और चौक-चौराहों से निकलकर सीधे घरों की दहलीज तक पहुंच चुका है। अधिकांश परिवारों में युवा नशे की गिरफ्त में आकर चोरी, झपटमारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं। इसका सीधा असर उनके परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।वे लोक लाज के डर से चुप रहने को विवश है और अपने बच्चों को इस दलदल में फसते हुए देख कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ब्राउन शुगर की आसान उपलब्धता और संगठित नेटवर्क के कारण बच्चों तक इसकी पहुंच आसान हो गई है। मुहल्ले की गली हो या या शहर का मुख्य चौराहा अब तो यह मोबाइल दुकान,राशन दुकान तक में बिकने लगा है। ड्रग्स पेडलर घुम घूम कर फेरी वालो की तरह ड्रग्स बेच रहे हैं। जिसके कारण समस्या और गंभीर हो गई है। कुछ असामाजिक तत्व युवाओं की कमजोरी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हें नशे की ओर धकेल रहे हैं। परिणामस्वरूप, क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आमजन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं । प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन यह प्रयास काफी नहीं हैं। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, समाज, परिवार और जिम्मेदार नागरिकों को एक साझा मंच पर आना होगा । सरकार को रोजगार सृजन कार्यक्रम के साथ साथ नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ठोस पुलिसिया कार्रवाई करनी होगी। यदि समय रहते ठोस ,सार्थक और सामूहिक पहल नहीं की गई, तो प्रखंड क्षेत्र में यह समस्या आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकती है। नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

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