जागता झारखंड संवाददाता : गुमला के मत्स्य विज्ञान विद्यालय में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस तथा रोकथाम पखवाड़ा के समापन अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर सारिब अहमद ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है । उन्होंने कहा कि जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों में आकर अपना जीवन समाप्त कर लेना, सही फैसला नहीं होता। वर्तमान के युवा हालातों से लड़ना नहीं सीख पा रहे हैं, जिससे उनमें तनाव और अवसाद की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसका खतरनाक परिणाम है आत्महत्या की बढ़ती संख्या। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं, जिसे सरल समझदारी और उचित मानसिक सहयोग से रोका जा सकता है।
डॉक्टर अहमद ने यह भी कहा कि आवश्यक है कि हम अपने आस-पास के लोगों के व्यवहार पर ध्यान दें । यदि कोई व्यक्ति अचानक अपने व्यवहार में बदलाव लाता है, अपने आसपास से दूरी बनाता है या जो कार्य पहले आनंद से करता था उसे छोड़ देता है तो उससे बातचीत कर उसकी मदद करनी चाहिए । इस प्रकार की सावधानी से अवसाद ग्रसित व्यक्ति को समय रहते उपचार व मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सकती है।
इसके बाद जिला मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र के मनोचिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता नील कुसुम लकड़ा ने छात्रों को 'मित्र निमोनिक' का प्रयोग कर समझाया कि कैसे दोस्तों की मदद से अवसाद में फंसे लोगों को प्रेरित किया जा सकता है। कार्यक्रम में मत्स्य विज्ञान विद्यालय के शिक्षकगण, जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्स नमीता कुमारी और सुजीत कुमार महतो सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।




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