जागता झारखंड ब्यूरो चीफ मीर उबैद उल्लाह लोहरदगा: लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केंद्र सरकार की नैतिक हार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दो वर्षों से चल रहे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव का परिणाम है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि दो वर्ष पहले राहुल गांधी ने देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए जो अभियान शुरू किया था, आज उसका पहला महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण नहीं, बल्कि जनता के दबाव के आगे सरकार के झुकने का संकेत है। उन्होंने कहा कि देशभर में युवाओं और छात्रों ने जिस तरह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उससे यह साबित हो गया कि उनकी मांगें न्यायसंगत थीं। यदि सही मुद्दों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया जाए तो सबसे अहंकारी सरकार को भी झुकना पड़ता है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इसी संघर्ष का परिणाम है।सांसद भगत ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतांत्रिक संघर्ष अंततः अपनी जीत दर्ज करता है।
जागता झारखंड ब्यूरो चीफ मीर उबैद उल्लाह लोहरदगा: लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केंद्र सरकार की नैतिक हार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दो वर्षों से चल रहे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव का परिणाम है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि दो वर्ष पहले राहुल गांधी ने देश के छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए जो अभियान शुरू किया था, आज उसका पहला महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण नहीं, बल्कि जनता के दबाव के आगे सरकार के झुकने का संकेत है। उन्होंने कहा कि देशभर में युवाओं और छात्रों ने जिस तरह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उससे यह साबित हो गया कि उनकी मांगें न्यायसंगत थीं। यदि सही मुद्दों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया जाए तो सबसे अहंकारी सरकार को भी झुकना पड़ता है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इसी संघर्ष का परिणाम है।सांसद भगत ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतांत्रिक संघर्ष अंततः अपनी जीत दर्ज करता है।


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