जागता झारखंड संवाददाता विक्की कुमार चैनपुर गुमला
चैनपुर: ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और दावों की पोल खोलती एक बेहद संवेदनहीन और दर्दनाक तस्वीर चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है। अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही, समय पर एम्बुलेंस और ऑक्सीजन की अनुपलब्धता के कारण 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम छात्रा शिवानी कुमारी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और स्थानीय ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।जानकारी के अनुसार, चैनपुर प्रेमनगर निवासी राजकुमार लोहरा की बेटी शिवानी कुमारी उम्र लगभग 15 वर्ष सुबह रोजाना की तरह स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी। स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान अचानक उसके सिर में असहनीय तेज दर्द शुरू हुआ। शिवानी दर्द से चिल्लाने लगी और उसे लगातार उल्टियां होने लगीं। बेटी की हालत बिगड़ती देख लाचार माता-पिता और परिजन उसे आनन-फानन में तुरंत चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।मृतक छात्रा के पिता राजकुमार लोहरा ने रोते हुए अस्पताल की बदहाली को बयां किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी ने उनकी गंभीर रूप से बीमार बेटी को संजीदगी से नहीं देखा और प्राथमिक उपचार करना छोड़, सीधे सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया।जब शिवानी की स्थिति और नाजुक होने लगी, तो परिजनों ने डॉक्टरों से गुमला या रांची ले जाने के लिए तत्काल सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। लेकिन संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एम्बुलेंस खराब है और स्टार्ट ही नहीं हो रही है।बेबस परिजन करीब एक से दो घंटे तक अस्पताल परिसर में ही एम्बुलेंस के लिए तड़पते रहे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली।जब सरकारी तंत्र से कोई उम्मीद नहीं बची, तो मजबूर पिता ने खुद एक निजी पिकअप वैन का इंतजाम किया। हैरान करने वाली बात यह रही कि मरीज की बेहद नाजुक स्थिति को जानते हुए भी चैनपुर अस्पताल प्रबंधन ने वैन में ऑक्सीजन तक की व्यवस्था नहीं कराई।परिजन शिवानी को पिकअप वैन में लिटाकर किसी तरह गुमला सदर अस्पताल पहुंचे। वहां भी डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रिम्स , रांची रेफर कर दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी; गुमला टाउन से निकलते ही रास्ते में शिवानी ने दम तोड़ दिया।शोकाकुल माता राजमुनी देवी मेंरी बेटी सुबह ठीक-ठाक थी, खाना खाकर स्कूल के लिए तैयार हुई थी। अचानक सिर दर्द हुआ और वह उल्टियां करने लगी। अस्पताल ले जाने पर न डॉक्टर ने देखा, न एम्बुलेंस मिली और न ही ऑक्सीजन दी। सरकारी अस्पताल की इसी बेरुखी ने मेरी बच्ची की जान ले ली।इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराई चिकित्सा व्यवस्था और बड़े-बड़े सरकारी दावों की हकीकत को उजागर कर दिया है। घटना के बाद से चैनपुर के स्थानीय लोगों में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा लापरवाही बरतने वाले दोषी डॉक्टरों और कर्मियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है।


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