खामेनेई ने ईरान को सशक्त राष्ट्र बनाया । देखेगी ...दुनिया का सबसे बड़ा जनाज़ा।

  


जागता झारखंड : डॉ निकिश कुमारी लेखिका , सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की अधिवक्ता हैं lमद्धपूर्व के इतिहास के सबसे चर्चित राजकीय शोक समारोह एक अतुलनीय प्रतीक के रूप में ऐतिहासिक मिसाल के साथ स्मारण रहेगा। 3 से 9 जुलाई तक चलने वाले इस अंतिम विदाई समारोह में दुनिया भर से 2 करोड़ से अधिक लोग शामिल होगें । दुनिया भर के लगभग 100 देश से अधिक देशों के प्रतिनिधि इस समारोह में भाग लेगें ।ईरान ने वैश्विक नेताओं का ध्यान, ईरान पर केंद्रित किया। दुनिया के महानतम व्यक्तित्वों ने जनाज़ा मे शामिल होकर ईरान के पक्ष में खड़े हुए। सभी मजहब के रहनुमाओं को , बंधुत्व के एक कतार में ला खड़ा किया। ईरान ने दुनिया के हर छोटे बड़े , पक्ष विपक्ष के नेताओं को अपने ग़म में शामिल करके अयातुल्लाह अली खामेनेई की शख्सियत को न सिर्फ बड़ा किया बल्कि आतंकवाद और मानव नरसंहार के समर्थक देशों इजराइल और अमेरिका को संसार के सामने पराजित कर विश्व मंच से अलग-थलग किया। 86 वर्षीय वयोवृद्ध ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई जो 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर बने रहे ने देश में ऐसी शासन व्यवस्था बनाई जो किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। उन्होंने संस्थाओं को इतना मजबूत बनाया की सरकार किसी नेता के हटने पर भी काम करती रहे। यही कारण है कि अमेरिका इजरायल युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता सहित कई सैन्य प्रमुख कमांडरों की हत्या के बावजूद देश की व्यवस्था नहीं टूटी और काम का तरीका हमेशा जारी रहा। ईरान किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहने वाली मजबूत व्यवस्था का बनना ही ईरान के सर्वोच्च नेता की सबसे बड़ी उपलब्धियां में से एक है। आज ईरान की तरफ दुनिया ना सिर्फ देख रही है बल्कि उसे शक्तिशाली राष्ट्र मान रही है । ईरान अपनी शर्तो पर युद्ध लड़ा और मानवाधिकार का रक्षक बनकर जीता । अयातुल्लाह अली खामेनेई ने ईरान को ईरानियत मे बदल कर हमेशा के लिए ईरान को शक्तिशाली राष्ट्रों के पंक्ति में ला खड़ा किया । दुनिया इस अजीम शख्सियत को हमेशा याद रखेगी। वह मर के भी जीवित रहेंगे और हमेशा ईरान को अपने पथ चिन्हों पर चलाते हुए ईरान को अग्रणी और सशक्त राष्ट्र की रहनुमाई करते रहेंगे ।हजरत अयातुल्लाह अली खामेनेई साहब को खिराज ए अकीदत पेश करते हुए खुशी हो रही है कि अगर शहीद की जनाज़ा ऐसी होती है तो मेरी हजारों जान कुर्बान। हर दौर में कुछ ऐसे नेता होते हैं जो सिर्फ सियासत नहीं करते बल्कि अपने मुल्क की सोच और दिशा तय करते हैं। मुश्किल हालात हों या अंतरराष्ट्रीय दबाव, उन्होंने हमेशा अपने देश की संप्रभूता और सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उनका मजबूत इरादा और अपने वतन के लिए अडिंग रवैया उनकी पहचान बना। जो उनके संघर्ष और समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल है। इतिहास ऐसे नामों की कारनामो को कभी भूलता नहीं, क्योंकि नेतृत्व सिर्फ पद नहीं, बल्कि कुर्बानी और विश्वास का प्रतीक होता है । निःसंदेह आप दुनिया के लोगों के दिलों मे जिन्दा रहकर हमेशा मुस्कुरातें रहेगें......। हम खुश किस्मत है कि तेरे दौर में पैदा होकर तुझे देख लिया वरना हमने तो बहादुरो के किस्से सिर्फ किताबों में पढ़े थे।


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