आदर में आरएसएस शताब्दी वर्ष पर विशाल नागरिक सम्मेलन, निशा उरांव ने उठाए पंचायत नियमों और धर्मांतरण पर सवाल

 


जागता झारखंड संवाददाता बजरंग कुमार महतो घाघरा (गुमला) :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर घाघरा प्रखंड क्षेत्र के आदर बाजार टांड़ में मंगलवार को विशाल नागरिक सम्मेलन का आयोजन किया गया । सम्मेलन की मुख्य अतिथि भारतीय राजस्व सेवा की अपर आयकर आयुक्त निशा उरांव रहीं । कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के द्वारा जतरा टाना भगत, बिरसा मुंडा एवं भारत माता की तस्वीरों पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अपर आयकर आयुक्त निशा उरांव ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायती राज विभाग से उनके जाने के बाद पेसा कानून में व्यापक परिवर्तन कर दिए गए, जो आदिवासी हितों के विरुद्ध है । वर्तमान पेसा नियमावली से विकास नहीं बल्कि विनाश की स्थिति उत्पन्न होगी । उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत ग्राम सभा का गठन गांव के लोग नहीं बल्कि जिले के अधिकारी करेंगे । इसी तरह योजनाओं का चयन भी गांव स्तर पर नहीं होकर जिला परिषद द्वारा किया जाएगा, जिससे गांव की शक्ति शहरों में चली जाएगी । निशा उरांव ने धार्मिक परंपराओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पहान धर्मांतरण कर रहे हैं, लेकिन फिर भी पहान बने हुए हैं । जबकि धार्मिक जिम्मेदारी के बदले दी गई पहनई जमीन पर उनका अधिकार तभी तक उचित है, जब तक वह इस धर्म और परंपरा का पालन करें । उन्होंने कहा कि जब धर्म बदला जा रहा है तो जमीन के अधिकार पर भी सवाल उठना चाहिए । उन्होंने खुटी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां महतो, पूजार और पहान को हटाकर सरकारी कर्मचारियों को सचिव, उपसचिव जैसे पदों पर बैठा दिया गया है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह बाहरी लोग हमारी रूढ़िवादी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा कर पाएंगे ।उन्होंने छत्तीसगढ़ के उदाहरण का आलेख करते हुए कहा कि वहां चंगाई सभा के दौरान गांव में बैनर लगाकर पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी । जिस पर मामला कोर्ट तक पहुंच गया जहां कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि धर्म का प्रचार करने का अधिकार है लेकिन धर्मांतरण कराने का अधिकार नहीं है ।वर्तमान पीढ़ी को परंपराओं की अंतिम पीढ़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज बहुत तेजी से बदल रहा है । पहनावा, संस्कृति और जीवन शैली में बदलाव हमारी पहचान के लिए खतरा बनता जा रहा है ।सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि गलत राजनीतिक गतिविधियों के कारण समाज अलगाव की ओर बढ़ रहा है । उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले आदिवासी समाज ने संघर्ष किया था । सीएनटी और एसपीटी एक्ट आदिवासियों के विद्रोह का परिणाम है, ना कि अंग्रेजों की देन ।कार्यक्रम में विभाग संपर्क प्रमुख रामप्रसाद बड़ाइक, दिलेश्वर पहान, मनोज दास, पुष्कर महतो, तेजू महतो, बादल राम, लाल साहू, दीपक सहित काफी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित थे ।



Post a Comment

और नया पुराने