पाकुड़ में पत्थर लोडिंग ठप, रेलवे को करोड़ों का नुकसान, व्यवसायियों का अल्टीमेटम



जागता झारखंड डेस्क: पत्थर कारोबारी ओनर एसोसिएशन के बैनर तले पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों ने शुक्रवार को रेलवे में पत्थर की लोडिंग पूरी तरह ठप कर दी। एसोसिएशन का आरोप है कि रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले पाकुड़ जिले की लगातार अनदेखी हो रही है, जो अब बर्दाश्त से बाहर है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने हाल ही में व्यवसायियों के साथ बैठक कर चेतावनी दी थी कि यदि पाकुड़ के यात्रियों को पर्याप्त ट्रेन सुविधाएं नहीं मिलीं, तो पत्थर लोडिंग बाधित की जाएगी। शुक्रवार को यह चेतावनी साकार हो गई।

प्रमुख मांगें

-🔴 कोविड-19 के दौरान से बंद ट्रेनों का तत्काल परिचालन बहाल करना।

🔴 पाकुड़ मार्ग से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करना।

🔴 पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करना।

🔴 यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करना।

व्यवसायी गोपी बत्रा ने कहा हम रेलवे को हर साल करोड़ों का राजस्व देते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता। पटना-दिल्ली के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं, लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनें बंद। प्लेटफॉर्म पर खड़े रह जाते हैं और ट्रेनें सीटी बजाकर निकल जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने तक लोडिंग नहीं होगी।

आर्थिक प्रभाव

- 🔴 रेलवे को प्रतिदिन करीब 2 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान।

🔴 राज्य सरकार को 40 लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान।

🔴 हजारों मजदूर प्रभावित, कोयले की ढुलाई पर भी खतरा।

शुक्रवार को अपर साइडिंग, लोअर साइडिंग, बहीरग्राम और तिलभिट्टा में रेलवे रैक खाली पड़े रहे। प्रतिदिन 6 रैक पत्थर लादे जाते थे, जो अब ठप। पंकज मिश्रा ने चेताया, "पाकुड़-साहिबगंज के साथ सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं। ट्रेनें न चलीं तो कोयला ढुलाई भी बंद।" हावड़ा डिवीजन के अधिकारियों तक आवाज पहुंचने तक आंदोलन जारी रहेगा।

Post a Comment

और नया पुराने