स्वर्गीय चंद्रिका महथा कि पुण्य तिथि 28 जनवरी को तपसीडीह में कार्यक्रम आयोजित

 



जागता झारखंड : गिरिडीह स्वर्गीय चंद्रिका महथा कि पुण्य तिथि 28 जनवरी को तपसीडीह में दोपहर 12 से उनके पुण्य तिथि पर कार्यक्रम आयोजित हैं।इस अवसार पर उन्हें याद कर नमन किया जाएगा। बताते चलें इस धरती पर

कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो किसी पद या ओहदे से नहीं, बल्कि अपने कर्म, संघर्ष और जनता के अपार प्रेम से पहचाने जाते हैं। स्वर्गीय चंद्रिका महथा जी ऐसे ही जननेता और समाजसेवी थे, जिनका संपूर्ण जीवन साधारण परिस्थितियों से निकलकर असाधारण जनसेवा की प्रेरक मिसाल बन गया। जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

स्वर्गीय चंद्रिका महथा जी का जन्म 10 अक्टूबर 1969 को एक अत्यंत साधारण परिवार में हुआ।

उनके पिता स्वर्गीय मुंशी महथा, कोल इंडिया धनबाद में एक मजदूर के रूप में कार्यरत थे। सीमित आय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

माता दुलारी देवी ने संघर्षों के बीच भी अपने संस्कार, धैर्य और सेवा भावना से उनके व्यक्तित्व को गढ़ा।

उनका पारिवारिक जीवन सादगी, अनुशासन और गरिमा से परिपूर्ण रहा।

उनकी धर्मपत्नी सुमित्रा देवी (देवरी प्रखंड की प्रथम प्रमुख) स्वयं समाजसेवा की एक सशक्त पहचान रहीं।

पुत्र ई. अनिल चौधरी (कांग्रेस नेता) एवं सुनील रंजन (MBBS) आज उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं।

पुत्रियाँ अनीता एवं नमिता, भाई अशोक महथा (असिस्टेंट इंजीनियर), अयोध्या चौधरी (PDS डीलर) तथा बहन प्रेमा देवी उनके जीवन की निरंतर प्रेरणा बने रहे। शिक्षा क्षेत्र में संघर्ष से शिखर तक

उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय मगडीहा में हुई, जहाँ प्रतिदिन एक छोटी नदी पार कर स्कूल पहुँचना उनकी दिनचर्या थी।

इसके बाद उन्होंने अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय, बरसोत से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की।

उसी विद्यालय में जमुआ के पूर्व विधायक केदार हाजरा उनके सीनियर रहे।

मैट्रिक के बाद उन्होंने गिरिडीह कॉलेज से स्नातक तथा रांची विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।

उस दौर में वे अपने समाज और आसपास के कई गाँवों में मैट्रिक, बीए और एमए उत्तीर्ण करने वाले एकमात्र युवक थे।

उनकी शिक्षा पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए आशा और प्रेरणा की किरण बन गई।

 सेवा का संस्कार

बचपन से ही सेवा उनके स्वभाव का हिस्सा थी।

उनके पास आवागमन का एकमात्र साधन साइकिल था, फिर भी जब किसी को अस्पताल, थाना या प्रखंड कार्यालय जाना होता,

चंद्रिका महथा जी सबसे पहले खड़े मिलते थे।

न केवल अपने गाँव, बल्कि आसपास के कई गाँवों के लोग भी हर समस्या लेकर उनके पास आते थे।

वे बिना किसी भेदभाव, बिना थके,

सिर्फ इंसान बनकर इंसान की सेवा करते थे। राजनीतिक जीवन

छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय रहे।

पूर्व विधायक बलदेव हाजरा के मार्गदर्शन में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में पहचान बनाई।

2005 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से चुनाव लड़ा, कुछ मतों से पराजय हुई फिर 2009 में झारखंड विकास मोर्चा से चुनाव लड़कर भारी मतों से विजयी हुए। वही 

2014 एवं 2019 में झामुमो एवं जेवीएम  से चुनाव लड़ा, पर विजय नहीं मिली

चुनावी जीत-हार भले चलती रही,

लेकिन जनता का भरोसा और प्रेम कभी कम नहीं हुआ।

विधायक रहते हुए उनके कार्यकाल में तीन बार राष्ट्रपति शासन लगा, जिसके कारण वे क्षेत्र के लिए देखे गए कई सपनों को साकार नहीं कर सके।

फिर भी उनके संक्षिप्त कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

कोई विवाद नहीं

सभी जाति-धर्म के लोगों का विश्वास

सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता थी।

 अंतिम समय

लगातार सेवा, अनियमित दिनचर्या और अथक परिश्रम के कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा।

28 जनवरी 2024 को मात्र 55 वर्ष की आयु में उन्होंने रिम्स , रांची में अंतिम सांस ली।

दुखद संयोग यह रहा कि पिता के निधन के ठीक एक वर्ष बाद ही वे भी इस संसार से विदा हो गए।

 विरासत

स्वर्गीय चंद्रिका महथा जी आज भले हमारे बीच नहीं हैं,लेकिन उनका संघर्ष, उनकी सादगी और जनता के प्रति उनका निस्वार्थ प्रेम

हमेशा जीवित रहेगा।

उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के संकल्प के साथ

उनके पुत्र अनिल चौधरी आज समाजसेवा और जनहित के मार्ग पर निरंतर अग्रसर हैं।

स्वर्गीय चंद्रिका महथा जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

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