जागता झारखंड संवाददाता महेशपुर, सूरज कुमार यादव: महेशपुर प्रखंड में इन दिनों डीप बोरिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि क्षेत्र में तेजी से चल रहे डीप बोरिंग का कार्य इन दिनों आम लोगो के साथ-साथ अधिकारियों को भी असमंजस में डाल दी है। बता दे की महेशपुर प्रखंड में लगातार डीप बोरिंग का कार्य चल रहा है। जहाँ आधे लागत पर डीप बोरिंग का कार्य किया जा रहा है। जबकि अधिकारी की माने तो ये किसी योजना से नहीं हो रही है। यही बात आम लोगो एवं अधिकारियों को असमंजस में डाल दी है। ये किसी को भी सक के दायरे में डाल दे की जिस कार्य में करीब 1.20 लाख की लागत आती हो,उस कार्य को 50 हज़ार में कैसे किया जा रहा है। प्रखंड के चंडालमारा में करीब 25 छोटे - बड़े डीप बोरिंग का कार्य पूरा कर दी गयी है। वही शुक्रवार को घाटचोरा और देवीनगर में डीप बोरिंग का कार्य चल रही है। इस सम्बन्ध में चंडालमारा के ग्रामीणों ने बताया की गाँव में करीब 25 डीप बोरिंग का कार्य हो चुकी है, जिसमे ग्रामीणों से 45-50 हज़ार रूपये लिया गया है। साथ ही कई लोग डीप बोरिंग को लेकर पैसा जमा कर चुके है। जिसका कार्य जल्द हो जायेगा।
*महेशपुर में बोरिंग बूम: पीएम कुसुम के नाम पर बड़ा खेल*
इस सन्दर्भ में एक ग्रामीण ने बताया की डीप बोरिंग का कार्य पीएम कुसुम योजना के तहत हो रही है। बता दे की पीएम कुसुम योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जो किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से सशक्त बनाने, डीजल पर निर्भरता खत्म करने और अतिरिक्त बिजली बेचकर उनकी आय बढ़ाने के लिए सौर पंप और ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में वित्तीय सहायता देती है। यह योजना किसानों को सस्ती और मुफ्त सिंचाई, बिजली बिल में बचत और पर्यावरण संरक्षण में मदद करती है, जिसके तहत सौर पंपों के लिए सब्सिडी, अतिरिक्त बिजली बेचने का मौका और सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना शामिल है। इसमें विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना,ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में स्टैंडअलोन सौर कृषि लगाना,
ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौर ऊर्जा पर संचालन करना शामिल है। इससे डीजल की लागत में बचत, अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय और सिंचाई के लिए सस्ती या मुफ्त बिजली शामिल है। वही इस योजना में झारखंड सरकार का पूरा योगदान है। यह केंद्र सरकार की योजना है जिसे राज्य सरकार, विशेषकर झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी के माध्यम से लागू किया जा रहा है। जिसमें किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए 90% तक सब्सिडी मिलती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य
किसानों को आत्मनिर्भर बनाना,डीजल और बिजली पर निर्भरता खत्म करना,सोलर पंप से जो बिजली बचती है, उसे किसान ग्रिड को बेचकर पैसे कमा कमाना, किसान अपनी बिजली खुद बनाते हैं, जिससे बिजली कटौती की समस्या नहीं होती है। साथ ही 24 घंटे पानी की उपलब्धता से बेहतर सिंचाई होती है, जिससे फसल उत्पादन बढ़ता है। वही सरकार सोलर पंप लगाने पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है, जिससे किसानों के लिए यह सस्ता हो जाता है।
सोलर पंपों का रखरखाव कम होता है, जिससे किसान आसानी से उपयोग कर पाते हैं। वही डीजल और बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पर्यावरण को लाभ होता है।
*कैसे काम करती है योजना*
सोलर पंप के लिए केंद्र सरकार 30 प्रतिशत सब्सिडी देती है। वही राज्य सरकार 30 प्रतिशत सब्सिडी देती है। किसान को केवल 10 प्रतिशत पैसा देना होता है। वही बाकी के 30 प्रतिशत बैंक से लोन के रूप में मिल सकता है। कुसुम योजना किसानों को सस्ती, भरोसेमंद और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा प्रदान करके उनकी कृषि लागत कम करती है और आय बढ़ाने में मदद करती है, जिससे वे सशक्त बनते हैं।
*दो तरह का बोरिंग निर्माण*
महेशपुर प्रखंड में बड़े और छोटे बोरिंग का लगायी जा रही है। ग्रामीनो ने बताया की छोटे बोरिंग के लिए 35 हज़ार और बड़े बोरिंग के लिए 45-50 हज़ार रूपये लिए गये है। उपरोक्त रूपये देर के बाद ग्रामीण के मन मुताबिक जगह पर डीप बोरिंग का कार्य कर दिया जा रहा है। ग्रामीनो ने बताया की 1 फिट में सौ रूपये चार्ज की जा रही है। बताया की जितना गहरा होगा, उस हिसाब से पैसे दी जा रही है। बताया की कम खर्च में बोरिंग होने के कारण लोग तेजी से बोरिंग का काम करवा रहे है। वही डीप बोरिंग के लिए आधार कार्ड, खजाना रसीद और फोटो भी लिया जा रहा है।
*योजना या घोटाला?*
डीप बोरिंग का कार्य लोगो के साथ - साथ अधिकारी का भी चिंता बढा दी है। अगर ये योजना है तो कौन का योजना के तहत कार्य हो रही है इसकी किसी को सटीक जानकारी नहीं है। वही अगर ये योजना नहीं है तो फिर आधे लागत पर कार्य कैसे हो रही है। ऐसे कई सवाल लोगो के साथ - साथ अधिकारिओं को चैन के नींद सोने नहीं दे रही है। सवाल यह भी है की अगर ये सरकारी योजना नहीं है तो इसका लाभ लेने के लिए खजाना रसीद का क्या आवशक्तता है।
*थाना पहुचा मामला, बीडीओ ने दी आवेदन*
डीप बोरिंग का मामला अब महेशपुर थाने तक पहुच चुकी है। इस सन्दर्भ में महेशपुर बीडीओ डॉ. सिद्धार्थ शंकर यादव ने कहा की डीप बोरिंग को लेकर उनके पास खबर आई है। उन्होंने कहा की शिकायत के बाद कई सम्बंधित विभाग से बात की गयी है। परन्तु कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पायी है की ये कार्य किस विभाग या किस योजना के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा की इसको लेकर महेशपुर थाने में लिखित आवेदन दी गयी है। कहा की बहुत जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। कहा की पुलिस कार्य करवाने वाले की तलाश में है। बोरिंग का रहस्यमई धंधा से चांदी काट रहे एजेंट
प्रखंड में तेजी से चल रहे डीप बोरिंग कार्य से इन दिनों परदे के पीछे से दो एजेंट चांदी काट रहे है। एक ग्रामीण ने नाम ना छापने के शर्त पर बताया की महेशपुर प्रखंड के सीरिसतल्ला गाँव निवासी श्याम चंद्र राय और जहरुद्दीन अंसारी महेशपुर के द्वारा ही ये सारे कार्य करवाये जा रहे है। बताया की गाँव में कई एजेंट को रख कर उपरोक्त परदे के पीछे से चांदी काट रहे है। बताया की अब तक उपरोक्त एजेंट के द्वारा करीब सौ से भी अधिक डीप बोरिंग करवा दिए गये है। सायद परदे के पीछे छुपे इन एजेंटो की ही तलाश पुलिस कर रही है। हालांकि ये जांच का विषय है।



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