लोहरदगा में आयोजित पेंशन अदालत: छह माह के भीतर पेंशन भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर

जागता झारखंड ब्यूरो चीफ मीर उबैद उल्लाह लोहरदगा


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लोहरदगा समाहरणालय परिसर में शनिवार को पेंशन अदालत का आयोजन प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), झारखण्ड, राँची के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए पेंशन जीवन पर्यंत आर्थिक सुरक्षा का साधन है, जिसे समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है। पेंशन मानवीय संवेदना पर नहीं बल्कि विधिक प्रावधानों के आधार पर दिया जाने वाला उनका वैधानिक अधिकार है।


इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि किसी भी सेवानिवृत्त कर्मी की पेंशन छह माह के भीतर शुरू हो जानी चाहिए। कार्यालयों को चाहिए कि सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन स्वीकृति हेतु कार्रवाई करें और सामान्य परिस्थितियों में किसी भी विसंगति को शीघ्र दूर कर दी जाए। साथ ही, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराए जाएं ताकि कर्मियों को आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।


उप विकास आयुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार ने सेवानिवृत्ति उपरांत कर्मियों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से पेंशन की व्यवस्था प्रारंभ की थी। आज का यह आयोजन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मियों को आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए।


कार्यक्रम में अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, अनुमण्डल दंडाधिकारी अमित कुमार, सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप, जिला परिवहन पदाधिकारी जया सांखी मुर्मू, सीएजी कार्यालय के उप महालेखाकार सुभाष कुमार रजक, वरीय लेखा पदाधिकारी (पेंशन) अजीत राजू राजन मिंज सहित कई अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्मी उपस्थित थे। यह अदालत पेंशन प्रक्रियाओं में आई बाधाओं के समाधान की दिशा में सार्थक पहल साबित हुई।

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