उपायुक्त ने कहा—प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी
जागता झारखंड ब्यूरो चीफ मीर उबैद उल्लाह लोहरदगा :सदर प्रखंड अंतर्गत हिरही पंचायत स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में करम पर्व की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त संदीप कुमार मीना शामिल हुए और विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ करम पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि करम पर्व सृष्टि का पर्व है। ये समस्त मानव, जीव जंतुओं का पर्व है क्योंकि इस संसार में कर्म ही धर्म है, धर्म ही कर्म है। ऐसा माना जाता है कि करम का वृक्ष 24 घंटा ऑक्सीजन देता है। यही कारण है कि करम वृक्ष की आराधना एवं पूजा की जाती है। प्रकृति के साथ हमारा गहरा संबंध है। ये कहना गलत नहीं होगा कि हम एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है।इस पर्व को न सिर्फ आदिवासी समुदाय के लोग धूमधाम से मनाते हैं बल्कि गैर आदिवासी लोग भी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। इस पर्व को भाई बहन का त्योहार के रूप में भी मनाते हैं, जहां बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। करम पूर्व की तैयारी तो लोग महीनों पहले से करते हैं। करम वृक्ष की डाली को आंगन या अखाड़ा में स्थापित किया जाता है जिसे जीवन, हरियाली और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।यह एक प्रमुख फसल उत्सव (हार्वेस्ट फेस्टिवल) है। किसान अच्छी पैदावार और खेतों की उर्वरता के लिए प्रार्थना करते हैं। बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। भाई अपनी बहनों को स्नेह और रक्षा का वचन देते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि इस संसार में कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। अच्छे काम करने से ही जीवन में सुख-शांति आती है।
अपनी परंपराओं से जुड़े, संरक्षण करें
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी जड़ों से जुड़ी होती है। अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ना, उनका महत्व समझना तथा उनका संरक्षण कर उन्हें आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। करम पर्व प्रकृति से जुड़ने और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भी प्रकृति और पारंपरिक जीवन मूल्यों के महत्व को समझ रही है। ऐसे में अपनी संस्कृति, पर्व-त्योहार, संगीत और परंपराओं को संरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।उपायुक्त ने विद्यार्थियों से कहा कि वे जीवन में चाहे जितनी ऊंची सफलता प्राप्त करें, अपनी संस्कृति और परंपराओं से हमेशा जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें, अपने लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करें। किसी भी प्रकार की गलत दिशा से स्वयं को दूर रखें।उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय का वातावरण बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ एक-दूसरे से सीखने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर देता है। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी एक-दूसरे के अनुभव और कौशल से सीख सकते हैं। इस प्रकार विद्यालय और हॉस्टल का वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उपायुक्त ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग उनके परिवार की तरह हैं। विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की कठिनाई या सुविधा की कमी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी पढ़ाई एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर ध्यान देने तथा अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया।उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए विभिन्न पर्व-त्योहारों, संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से बच्चे अपनी संस्कृति को समझते हैं और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।इस अवसर पर उपायुक्त ने विद्यालय परिवार को करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कार्यक्रम के आयोजन के लिए विद्यालय की पूरी टीम को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर परियोजना निदेशक आईटीडीए सुषमा नीलम सोरेंग, जिला शिक्षा पदाधिकारी दास सुनंदा चंद्रमौलेश्वर व विद्यालय के शिक्षक एवं छात्राएं उपस्थित थे।


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