प्रतिनिधि: जागता झारखंड, कटिहार (बिहार) कांग्रेस में मची रार अब भीषण बगावत में तब्दील हो चुकी है। पार्टी के स्वयंभू 'भीष्म पितामह' सांसद तारिक अनवर के खिलाफ पूर्व जिला महासचिव और जिला अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार मसरूर आलम ने ऐसा मोर्चा खोला है कि जिले की सियासत में भूचाल आ गया है। आलम ने सांसद के राजनीतिक चरित्र के परखच्चे उड़ाते हुए दो टूक कहा कि 'साहब' को आलाकमान के आदर्श तभी याद आते हैं जब उनके चाटुकारों को मलाईदार कुर्सियां मिलती हैं। सांसद द्वारा ब्लॉक स्तर पर अपने 'निजी प्रतिनिधि' नियुक्त करने के ऐलान को आलम ने पार्टी के आधिकारिक ढांचे को दफन कर एक 'समानांतर साम्राज्य' खड़ा करने की गंदी साजिश करार दिया है।मसरूर आलम ने सांसद की तथाकथित 'मजबूत पकड़' के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए राज्यसभा प्रकरण का मुद्दा उछाला। उन्होंने तंज कसा कि सांसद के सबसे चहेते मनिहारी विधायक मनोहर सिंह ने राज्यसभा वोटिंग के दौरान पार्टी के स्पष्ट निर्देश को ठेंगा दिखा दिया, जो यह बताने के लिए काफी है कि सांसद का अपना किला कितना खोखला हो चुका है। आलम ने दहाड़ते हुए कहा कि तारिक अनवर ने वफादारों को हाशिए पर धकेलकर 'जीरो मेंबरशिप' वाले कठपुतलियों और दूसरी पार्टियों से आए 'आयाराम-गयाराम' किस्म के लोगों को जिला अध्यक्ष की कुर्सी और महत्वपूर्ण पदों की रेवड़ियाँ बांटकर जिले को अपनी जागीर बना लिया है। आलम यहीं नहीं रुके; उन्होंने सीधे तौर पर आरोप जड़ा कि आज कटिहार की हवाओं में सांसद निधि के 'मोटा कमीशन' की सड़न तैर रही है, जिसकी बंदरबांट के चक्कर में समर्पित कार्यकर्ताओं का गला घोंटा गया।बिहार विधानसभा में कांग्रेस के नेता रहे शकील अहमद खान और राष्ट्रीय सचिव तौकीर आलम के साथ सांसद के रिश्तों की कलई खोलते हुए मसरूर आलम ने सबसे बड़ा धमाका किया। आलम ने तीखे शब्दों में कहा कि "पूनम पासवान को हराने की साजिश हो या राहुल गांधी जब बंगाल चुनाव में पसीना बहा रहे थे, उस समय संगठन के वजूद को नकारना"—तारिक अनवर की इन्हीं करतूतों ने हमेशा कांग्रेस को कमजोर कर एनडीए को ऑक्सीजन देने का काम किया है। निष्ठावान मुस्लिम नेताओं को अपमानित करने और पार्टी को अपनी जागीर समझने वाले सांसद को चेतावनी देते हुए आलम ने कहा कि अब कार्यकर्ता और जनता इन्हें घर बैठाने का मुकम्मल फैसला कर चुके हैं।


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