बायर-सेलर मीटिंग में बांस शिल्प, मुड़ी उत्पादन, पत्तल निर्माण के उत्पादों एवं पशुधन व्यापार को बढ़ावा दिया गया



जागता झारखंड रानीश्वर दुमका ब्यूरो :

दुमका जिले के अंतर्गत रानेश्वर प्रखंड के चार पंचायत में संचालित एम पावर्ड परियोजना के तहत मोहुलबोना पंचायत भवन में स्वयं सहायता समूह के परियोजना प्रतिभागियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम चेतना विकास एवं ट्रिकलअप इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान से दिनांक 27/02/2026 को पंचायत सचिवालय मोहुलबोना में *बायर सेलर मीट कार्यक्रम* का आयोजन किया गया। जिसमें प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ . माइकल सोरेन,चेतना विकास के सचिव कुमार रंजन, ट्रिकलअप इंडिया फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड निलंजना शर्मा एवं सत्यजीत घोष - निगरानी और मूल्यांकन,पंचायत के मुखिया मुनमुन मरांडी 

सुरेंदर हांसदा - सी सी, झारखंड स्टैट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी,कृषि विभाग से ए टी एम राजीव मुर्मू एवं स्टेड बैंक ऑफ इंडिया और झारखान राज्य ग्रामीण बैंक के बैंक सखी ने भाग लिया। इस बायर-सेलर मीटिंग में बांस शिल्प, मुड़ी उत्पादन, पत्तल (दोना-पत्तल) निर्माण तथा पशुधन ट्रेड से जुड़े उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों , व्यापारियों एवं बड़े खरीदारों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ना, उचित मूल्य सुनिश्चित करना तथा उत्पादकों की आय में वृद्धि करना रहा।

प्रमुख आकर्षण

बांस शिल्प प्रदर्शनी:

हस्तनिर्मित टोकरी, फर्नीचर, सजावटी वस्तुएं एवं उपयोगी घरेलू उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिन्हें खरीदारों ने सराहा एवं उत्पाद खरीद हेतु आर्डर दिया।

मुड़ी उत्पादन:

स्थानीय स्तर पर तैयार गुणवत्तापूर्ण मुड़ी के पैकेज्ड और थोक उत्पादों के लिए विभिन्न रिटेल चेन एवं वितरकों के साथ 4000 क्विंटल मुढ़ी के प्रारंभिक समझौते हुए।

पत्तल निर्माण:

पर्यावरण-अनुकूल दोना-पत्तल उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए होटल, कैटरिंग, खुदरा एवं थोक विक्रय से जुड़े खरीदारों ने 18 रु प्रति बंडल के अभी तक 12000 बंडल ऑर्डर बुक किए।

पशुधन व्यापार:

बकरी, मुर्गीपालन एवं सूअर पालन पशुधन से जुड़े उत्पादकों को संगठित बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष चर्चा हुई। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी महोदय ने परियोजना प्रतिभागियों को प्रखंड से पशुपालन सम्बंधित सभी प्रकार के सहयोग प्रदान करने की बात कहा। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने डिजिटल मार्केटिंग पर मार्गदर्शन दिया। कई स्वयं सहायता समूहों विपणन सहायता प्रदान की गई।

समापन:

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए नियमित रूप से इस प्रकार के मंच उपलब्ध कराने की मांग की,प्रखंड पदाधिकारियों एवं संस्था से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की बायर-सेलर मीटिंग से स्थानीय उत्पादों को बड़े स्तर पर पहचान मिलेगी और स्वयं सहायता समूह के महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन जिला एवं प्रखंड स्तर पर भी किया जाएगा, आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और खरीदारों का आभार व्यक्त किया।



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