बसंत कुमार गुप्ता गुमला। गुमला जिले के सिसई, बसिया घाघरा एवं गुमला रायडीह आदि क्षेत्रों में बालू का अवैध उत्खनन के कार्य का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन के द्वारा लगातार छापामारी अभियान चलाई जा रही है लेकिन बालू तस्करी नहीं रूक सकता। दक्षिणी कोयल नदी ,नागफेनी,चैलीटोली,भंडारिया अटरिया जोलो नदी,मुरगू नवाटोली आदि इलाकों से अवैध बालू तस्करी दिन-रात हो रही है। बालू तस्करी सीधे गांव की नदी घाटो से उठकर झारखंड की राजधानी एवं रांची और अन्य इलाकों में भी हो रहा है।
रायडीह प्रखंड में शंख नदी से ट्रैक्टरों द्वारा अवैध बालू उठाव, प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं के हौसले बुलंद
रायडीह प्रखंड अंतर्गत शंख नदी इन दिनों अवैध बालू माफियाओं के निशाने पर है। नदी के विभिन्न घाटों से ट्रैक्टरों के माध्यम से खुलेआम अवैध बालू उठाव किया जा रहा है। प्रतिदिन सुबह से शाम तक बिना किसी वैध अनुमति के ट्रैक्टर नदी किनारे पहुंच रहे हैं और बालू लादकर बेखौफ सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। यह अवैध गतिविधि दिन-दहाड़े जारी है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि बालू माफियाओं को न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन का।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शंख नदी से लगातार हो रहे इस अवैध बालू खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना को गंभीर क्षति पहुंच रही है। नदी का जलस्तर असंतुलित हो रहा है, किनारों पर तेज कटाव देखने को मिल रहा है और भविष्य में जलस्रोतों के सूखने की आशंका भी गहराती जा रही है। वहीं, भारी-भरकम ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत बद से बदतर हो चुकी है, जिससे आम लोगों, स्कूली बच्चों और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध बालू से लदे ट्रैक्टर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं ग्रामीण सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद अब तक न तो प्रखंड प्रशासन, न खनन विभाग और न ही पुलिस की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई की गई है। प्रशासन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और कहीं न कहीं अवैध बालू कारोबार को मौन समर्थन देने का संकेत देती प्रतीत होती है।केवल रायडीह ही नहीं, बल्कि सुरसांग थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से भी शंख नदी और उसके आसपास के इलाकों में अवैध बालू उठाव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सुरसांग क्षेत्र में भी ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू की ढुलाई बेरोकटोक जारी है, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।इस अवैध बालू खनन से जहां सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरणीय संतुलन भी तेजी से बिगड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शंख नदी से हो रहे अवैध बालू उठाव पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा नियमित छापेमारी अभियान चलाकर ट्रैक्टरों की अवैध ढुलाई पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर कब संज्ञान लेता है और अवैध बालू माफियाओं के खिलाफ कब तक ठोस कार्रवाई होती है, या फिर शंख नदी यूं ही माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी।



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