जागता झारखंड दुमका ब्यूरो। संथाल परगना प्रमंडल के आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब (हड़िया दारु) की खुलेआम बिक्री, फुटबॉल खेलों, रात्रि जात्रा ड्रामा, आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों और भैंस लड़ाई जैसी असामाजिक गतिविधियों के बढ़ते चलन को लेकर भारत दिसोम आदिवासी संघ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संघ के प्रतिनिधि ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।संघ का कहना है कि जब ये कार्यक्रम आदिवासी समाज के सांस्कृतिक रूप में आयोजित होते हैं, तब असामाजिक तत्वों द्वारा नशे को बढ़ावा देना और महिलाओं की सुरक्षा की कमी के कारण क्षेत्र में अन्याय, शोषण व अपराध की स्थिति उत्पन्न हो रही है। फुटबॉल टूर्नामेंट जैसे आयोजन भी कई बार नशे और जुए के अलावा अपराध का गढ़ बन चुके हैं।संघ की ओर से बताया गया कि आदिवासी इलाकों के चौक-चौराहों पर 24 घंटे हड़िया दारु की दुकानें चल रही हैं, जिससे स्थानीय लोग संवैधानिक अधिकारों से वंचित होते जा रहे हैं और सामाजिक मूल्यों में गिरावट आ रही है। भारत दिसोम आदिवासी संघ ने प्रशासन से आग्रह किया है कि नशे की इस महामारी पर तत्काल नियंत्रण और प्रतिबंध लगाएं नहीं तो वे जन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।संघ ने अपने संथाल परगना प्रमंडल के सभी पांच जिलों (दुमका, जामताड़ा, गढ़वा, पाकुड़, साहिबगंज एवं देवघर) से जुड़े 72 सक्रिय सदस्यों की सूची भी प्रस्तुत की है, जो स्थानीय स्तर पर इस समस्या को समझने, जागरूकता फैलाने और पुलिस प्रशासन को सूचनाएं देने का संकल्प लेकर कार्यरत हैं।भारत दिसोम आदिवासी संघ का प्रमुख उद्देश्य नशामुक्त और सशक्त आदिवासी समाज का निर्माण करना है। उन्होंने विनती की है कि समाज के भले और विकास के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में निर्णायक कदम उठाए।


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