जागता झारखंड संवाददाता विक्की कुमार चैनपुर/ गुमला
चैनपुर स्थित लाइफ लाइन हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात मामले के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम पांच बजे बताया गया कि सिविल सर्जन डॉक्टर शंभूनाथ चौधरी स्वयं अस्पताल परिसर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान अस्पताल का संचालक मौके पर मौजूद नहीं मिला, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के अंदर रखी दवाओं, मशीनों और चिकित्सीय उपकरणों की जांच की गई। उपलब्ध संसाधनों को देखकर प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि यहां लंबे समय से स्त्री रोग सहित अन्य बीमारियों का इलाज किया जा रहा था। बिना वैध पंजीकरण और विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी के इस तरह चिकित्सा सेवा चलाना स्वास्थ्य विभाग के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब डॉक्टर प्रभात के बयानों को लेकर विरोधाभास सामने आया। छापेमारी के दिन जब पीड़िता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, तब उन्होंने कहा था कि मरीज किस अस्पताल से आई है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है और वे उस समय अस्पताल में मौजूद थे। वहीं अब उनका कहना है कि वे केवल लाइफ लाइन हॉस्पिटल में एक्स-रे का रेट पूछने गए थे। दोनों बयानों में अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले की सच्चाई को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि सिविल सर्जन डॉक्टर शंभूनाथ चौधरी ने स्पष्ट किया कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इधर जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अवैध क्लीनिक समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं और यह सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से जिले में संचालित सभी अवैध क्लीनिकों की पहचान कर तत्काल बंद करने तथा जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है और सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि बिना पंजीकरण और योग्य डॉक्टर के अस्पताल इतने लंबे समय तक कैसे संचालित होता रहा। अब आम लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच पूरी होने के बाद प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है।




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